उत्तराखंड की औद्योगिक पहचान कहे जाने वाले लालकुआं शहर के इतिहास में 1 अगस्त का दिन एक ऐसे नए युग की शुरुआत का साक्षी बना, जिसकी गूंज पूरे कुमाऊं और राज्य के आर्थिक परिदृश्य पर सुनाई दे रही है। बीते चार दशकों से इस क्षेत्र के आर्थिक जीवन चक्र, रोजगार और बाजार की रीढ़ रही ‘सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल’ अब औपचारिक रूप से देश के अग्रणी व्यावसायिक घराने ‘आईटीसी लिमिटेड’ के हाथों में सौंप दी गई है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट लिमिटेड के साथ हुए करीब 3,498 करोड़ रुपये के भव्य सौदे के तहत इस मिल का संपूर्ण मालिकाना हक और परिचालन अब आईटीसी के पास आ गया है।
यह परिवर्तन केवल एक कॉरपोरेट कागजी कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि लालकुआं के इतिहास का सबसे बड़ा औद्योगिक मोड़ है। भूमि, लीज और प्रशासनिक औपचारिकताओं के साथ-साथ मिल के समस्त अधिकारियों, नियमित कर्मचारियों, स्टाफ और ठेका कर्मियों के स्थानांतरण संबंधी पत्रों पर हस्ताक्षरों की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इस ऐतिहासिक विलय और नए युग के आगमन का जश्न मनाने के लिए आईटीसी प्रबंधन ने मिल परिसर स्थित भोजनालय में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भव्य दोपहर व रात्रिभोज का आयोजन किया। इस दौरान आईटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारियों का नए परिवार में गर्मजोशी से स्वागत किया, उन्हें नई व्यवस्था में शामिल होने पर बधाई दी और इस नई यात्रा के आरंभ पर विशेष उपहार व पारितोषिक भेंट कर सम्मानित किया।
लालकुआं की इस मिल की नींव वर्ष 1984 में उत्तराखंड के कद्दावर नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी की दूरगामी सोच और प्रयासों से रखी गई थी। आदित्य बिड़ला समूह की देखरेख में पिछले 41 वर्षों के दौरान इस मिल ने न केवल भारतीय कागज उद्योग में लालकुआं को एक खास पहचान दिलाई, बल्कि पूरे इलाके के जनजीवन को गहराई से प्रभावित किया। आज इस मिल में लगभग 8,000 अधिकारी, कर्मचारी और ठेका मजदूर कार्यरत हैं। लालकुआं मुख्य शहर, घोड़ानाला और बिंदुखत्ता जैसे विस्तृत इलाकों के हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी और खट्टी-मीठी यादें सीधे तौर पर इस कारखाने से जुड़ी हुई हैं।
अब जब इस प्रतिष्ठित इकाई की कमान आईटीसी लिमिटेड के हाथों में आई है, तो यह समझना जरूरी है कि यह नया प्रबंधन कितना शक्तिशाली और अनुभवी है। वर्ष 1910 में ‘इंपीरियल टोबैको कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ के रूप में स्थापित हुई इस कंपनी ने समय के साथ भारत के आर्थिक ताने-बाने में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। 1970 के दशक में ‘इंडिया टोबैको कंपनी’ से होते हुए 2001 में ‘आईटीसी लिमिटेड’ बनने तक इस समूह ने तंबाकू कारोबार से आगे बढ़कर खुद को भारत के सबसे बड़े बहुआयामी दिग्गजों में ढाला है। आज आईटीसी एफएमसीजी (आशीर्वाद आटा, सनफीस्ट बिस्किट, बिंगो, यिप्पी नूडल्स), लग्जरी होटल्स, कृषि-कारोबार (विश्व प्रसिद्ध ई-चौपाल पहल), आईटी सॉल्यूशंस और ‘पेपरबोर्ड्स एंड स्पेशलिटी पेपर्स’ (PSPD) के क्षेत्र में देश का अग्रिम संस्थान है।
विशेष रूप से कागज और पैकेजिंग के क्षेत्र में आईटीसी का ट्रैक रिकॉर्ड बेमिसाल रहा है। तेलंगाना के भद्राचलम में स्थित आईटीसी का पेपरबोर्ड प्लांट दुनिया के सबसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल कारखानों में गिना जाता है। आईटीसी ‘ट्रिपल बॉटम लाइन’ दर्शन पर काम करती है, जहाँ आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक उत्थान और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिक महत्व दिया जाता है। आईटीसी दुनिया की उन विरली कंपनियों में शामिल है जो लगातार दो दशकों से ‘कार्बन पॉजिटिव’, ‘वॉटर पॉजिटिव’ और ‘सॉलिड वेस्ट रीसाइक्लिंग पॉजिटिव’ बनी हुई है। सामाजिक वानिकी (Social Forestry) के जरिए लाखों एकड़ में पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण करने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का आईटीसी का मॉडल दुनिया भर में सराहा गया है।
इसी समृद्ध अनुभव और तकनीकी क्षमता के साथ आईटीसी का लालकुआं में आगमन क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी उम्मीदें लेकर आया है। स्थानीय लोगों और श्रमिकों को भरोसा है कि आईटीसी के विशाल संसाधनों और वैश्विक दृष्टि से मिल में अत्याधुनिक तकनीक का समावेश होगा, नए सिरे से बड़ा पूंजीगत निवेश किया जाएगा और उत्पादन क्षमता में कई गुना इजाफा होगा। इससे प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, कच्चा माल आपूर्ति और स्थानीय बाज़ारों में अभूतपूर्व तेजी आएगी।
वर्तमान समय में लालकुआं, घोड़ानाला और बिंदुखत्ता क्षेत्र के सैकड़ों प्रतिभावान युवा नौकरियों की तलाश में सिडकुल (पंतनगर व हरिद्वार) जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में जाने को मजबूर हैं। आईटीसी द्वारा मिल के नए सिरे से विस्तार और आधुनिकीकरण की संभावनाओं ने इन युवाओं में अपने ही गृहक्षेत्र में सुरक्षित, स्थिर और बेहतर रोजगार पाने की नई उम्मीदें जगा दी हैं। सेंचुरी मिल की 41 साल पुरानी विरासत अब आईटीसी की दूरदर्शिता के साथ मिलकर लालकुआं को औद्योगिक प्रगति के एक नए और स्वर्णिम शिखर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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