माँ अवंतिका के दरबार में जब सेवादारों के चेहरे पर खिली अनोखी मुस्कान: रोशनी के पर्व पर लालकुआँ में दिखा सेवा और समर्पण का अनूठा संगम
लालकुआँ। दीपावली की जगमगाती संध्या पर जहाँ हर कोई अपने घरों को दीपों से सजाने में व्यस्त था, वहीं नगर के प्रसिद्ध शक्ति स्थल माँ अवंतिका कुंज मंदिर में कुछ ऐसा घटित हुआ जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया। मंदिर परिसर में वर्षों से निस्वार्थ भाव से झाड़ू-बुहारू और व्यवस्था संभालने वाली मातृ शक्तियों को उस वक्त सुखद आश्चर्य हुआ, जब नगर की जानी-मानी समाजसेविका प्रेमलता खुराना अपने सुपुत्र अनुभव खुराना के साथ सीधे उनके बीच पहुँचीं और उनकी सेवा साधना को नमन करते हुए उनके हाथों में खुशियों का उपहार थमा दिया।
दीपोत्सव के इस पावन अवसर पर खुराना परिवार ने माँ अवंतिका के श्रीचरणों में विधिवत पूजा-अर्चना कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके उपरांत उन्होंने मंदिर की निरंतर सेवा में जुटीं दो दर्जन से अधिक मातृ शक्तियों को अंगवस्त्र एवं मिष्ठान्न भेंट कर दीपावली की खुशियाँ साझा कीं। अचानक मिले इस सम्मान और स्नेह से सेवादार महिलाओं के चेहरे खिल उठे और कई माताओं की आँखें खुशी से छलक पड़ीं।
इस भावुक और प्रेरणादायी क्षण के दौरान मंदिर के मुख्य आचार्य पं. चन्द्रशेखर जोशी, मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खाती, संरक्षक कुन्दन सिंह नेगी, प्रमुख समाजसेवी गोपाल दत्त जोशी सहित पुष्पा देवी, मंजू देवी, सुमन देवी, राम खिलौना, जसौदा देवी, बबली देवी, कमलेश देवी आदि उपस्थित रहे। मंदिर समिति एवं उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने खुराना परिवार की इस अनुकरणीय उदारता और संवेदनशील पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। मंदिर कमेटी की ओर से समाजसेविका प्रेमलता खुराना एवं अनुभव खुराना को सम्मान स्वरूप ‘माँ अवंतिका’ पुस्तक भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया।
समाजसेविका प्रेमलता खुराना का संदेश
“दीपावली केवल अपने आशियाने को दीपों से सजाने का पर्व नहीं है, बल्कि उन चेहरों पर मुस्कान बिखेरने का अवसर है जो दिन-रात निस्वार्थ भाव से समाज और धर्म की सेवा में लगे रहते हैं। माँ अवंतिका के इस पावन धाम को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित रखने वाली ये मातृ शक्तियाँ साक्षात भगवती का स्वरूप हैं। जब तक हम समाज के हर वर्ग, विशेषकर निःस्वार्थ भाव से सेवा करने वालों के जीवन में उजाला नहीं लाते, तब तक दीपोत्सव का संकल्प अधूरा है। वास्तविक पूजा वही है जो किसी जरूरतमंद और निष्ठावान के चेहरे पर सच्ची खुशी बनकर खिले।”
— प्रेमलता खुराना (समाजसेविका)
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