शैल शक्ति ब्यूरो, हल्द्वानी।
दीपावली का महापर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय और अंतर्मन में नई चेतना के संचार का प्रतीक है। दीपोत्सव की बेला में जब चारों ओर मिट्टी के दीपों की कतारें सजती हैं, तब वास्तविक दीपावली उन घरों और आंगनों में मनती है जहां किसी की आंखों का घना अंधकार छंटता है और संसार के समस्त रंग एक बार फिर सजीव हो उठते हैं। दीप ज्योति से नेत्र ज्योति का यही पावन और मंगलकारी संदेश हल्द्वानी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में हर रोज चरितार्थ होता दिखाई देता है। संस्थान के नेत्र रोग विभाग में सेवारत वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन मेहरोत्रा वर्षों से हजारों असहाय और दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में रोशनी की नई प्रभा बिखेरकर सच्चे अर्थों में प्रकाश पर्व की सार्थकता सिद्ध कर रहे हैं।
कुमाऊं और सीमांत पर्वतीय अंचलों के लिए सुशीला तिवारी चिकित्सालय केवल एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि जीवन और उम्मीदों का सबसे बड़ा संबल है। पिथौरागढ़ की ऊंची चोटियों, चम्पावत की घाटियों, अल्मोड़ा, बागेश्वर के सुदूर पर्वतीय गांवों से लेकर तराई भाबर तक से जब कोई मोतियाबिंद या गंभीर दृष्टिहीनता से जूझता बुजुर्ग अथवा लाचार व्यक्ति यहां की दहलीज लांघता है, तो उसके मन का सबसे बड़ा विश्वास डॉ. नितिन मेहरोत्रा होते हैं। आधुनिक फेको तकनीक से मोतियाबिंद के जटिल शल्य परीक्षण हों, ग्लूकोमा का प्रबंधन, कॉर्निया के उपचार अथवा किसी आकस्मिक नेत्र आघात के नाजुक मामले, उनकी सधी हुई सर्जिकल दक्षता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने अनगिनत बुझती हुई आंखों को नई जिंदगी और दृष्टि दी है।
चिकित्सा विज्ञान केवल उन्नत उपकरणों और औषधियों का नाम नहीं है, बल्कि मरीज के दर्द को गहराई से महसूस करने वाली मानवीय संवेदना ही इसे देवतुल्य बनाती है। ओपीडी में उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच भी डॉ. नितिन मेहरोत्रा का शांत और आत्मीय व्यवहार, हर मरीज की व्यथा को धैर्य से सुनना और ऑपरेशन टेबल पर जाने से पहले उसके मन से भय दूर कर उम्मीद की किरण जगाना उनकी विशिष्ट कार्यशैली का हिस्सा है। दूरदराज से पहुंचे निर्धन, असहाय और साधनहीन मरीजों के लिए उनकी यही संवेदनशीलता किसी वरदान से कम साबित नहीं होती।
एक उत्कृष्ट शल्य चिकित्सक होने के साथ ही वे मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत भावी चिकित्सकों, परास्नातक रेजीडेंट डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के प्रेरक मार्गदर्शक भी हैं। वे युवा पीढ़ी को आधुनिक नेत्र विज्ञान के तकनीकी गुर सिखाने के साथ-साथ चिकित्सा धर्म, निस्वार्थ सेवा भाव और मानवीय सरोकारों का संस्कार भी प्रदान करते हैं।
दीपोत्सव का वास्तविक मर्म यही सिखाता है कि दीए की लौ केवल चौखट तक सीमित न रहे, बल्कि वह किसी जरूरतमंद के जीवन का अंधेरा दूर भगाकर नेत्र ज्योति में बदल जाए। जब एक दृष्टिबाधित व्यक्ति सफल उपचार के बाद अपनी आंखों से दुनिया की सुंदरता और दीपावली के जगमगाते दीपों को निहारता है, तो उसके चेहरे पर तैरती मुस्कान ही इस धरती की सबसे पावन रोशनी बन जाती है। सेवा, निष्ठा और मानवीय संवेदना के इसी संगम से डॉ. नितिन मेहरोत्रा का यह मौन सेवा महायज्ञ देवभूमि की स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई गरिमा और ऊंचाई प्रदान कर रहा है।
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