विधायकों के भत्ते बेतहाशा बढ़े, पर आशाओं के साथ इतना बड़ा छल क्यों? हल्द्वानी बैठक से फूटा आक्रोश!

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17 अगस्त
हल्द्वानी
हल्द्वानी/ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हल्द्वानी में हुई. बैठक की शुरुआत ऐक्टू के प्रदेश अध्यक्ष रहे कामरेड निशान सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट के मौन के साथ हुई, जिनका 18 जुलाई 2026 को देहावसान हो गया था.

मुख्य वक्ता के रूप में बैठक को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी ने कहा कि, मोदी सरकार एनएचएम का बजट घटाकर आशाओं के नियमितीकरण के लिए बाधा खड़ी कर रही है. असल में यह सरकार स्कीम वर्कर्स समेत सभी मजदूरों को लगातार बदहाली की ओर धकेल रही है.
उन्होंने कहा कि, कोरोना महामारी के समय डब्ल्यूएचओ ने भी आशाओं के काम की सराहना की थी. ऐसे में होना तो यह चाहिए था कि आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाता लेकिन इसके विपरीत आशाओं पर काम का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है परंतु न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा से आशायें वंचित हैं. इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ मजदूरों के मजबूत संगठन और बड़े पैमाने के एकताबद्ध संघर्ष की आवश्यकता है.

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भाकपा (माले) राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि, उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार विधानसभा में बार बार खुद ही मेजें थपथपाकर विधायकों के वेतन भत्ते लगातार बढ़ाती जा रही है, उनको पेंशन दी जा रही है लेकिन आशा वर्कर्स जो दिन रात मातृ शिशु सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को चला रही हैं उनको दैनिक मजदूर से भी कम पैसा मिल रहा है, यह बेहद शर्मनाक है। केंद्र और राज्य सरकारों को आशाओं के मानदेय बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान करना चाहिए जिससे उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिल सके.

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ऐक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरा ने कहा कि, भाजपा सरकार आशा जैसी महिला कामगारों का आर्थिक शोषण कर रही है और उनसे बंधुवा मजदूरों की भांति काम लिया जा रहा है. हमेशा महिला सम्मान का ढोल पीटने वाली सरकार का महिला श्रम के प्रति यह नजरिया बेहद शर्मनाक है.

आशा यूनियन प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि, राज्य के मुख्यमंत्री को 31 अगस्त 2021 को खटीमा स्थित कैम्प कार्यालय में आशाओं के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद मासिक मानदेय नियत करने व डी.जी. हेल्थ उत्तराखंड के आशाओं को लेकर बनाये गये प्रस्ताव को लागू करते हुए प्रतिमाह 11500 रूपये का वादा तत्काल पूरा करना चाहिए. अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा.

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22 नवंबर को ऐक्टू द्वारा आशाओं समेत सभी कामगारों को नियमित वेतन और स्थायीकरण समेत अन्य मांगों पर देहरादून में होने वाली प्रस्तावित विशाल रैली की तैयारी पर विस्तार से चर्चा की गई और उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की ओर से तय किया गया कि यूनियन पूरी ताकत से रैली में शामिल होगी.

बैठक में राजीव डिमरी, इंद्रेश मैखुरी, के के बोरा, कमला कुंजवाल, रीता कश्यप, सरस्वती पुनेठा, मीना आर्य, बबीता कश्यप, अनीता अन्ना, बबीता सिनग्वाल, राधा देवी, रूप किशोरी, लीला बिष्ट आदि शामिल रहीं. संचालन यूनियन महामंत्री डॉ कैलाश पाण्डेय ने किया.

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