हल्द्वानी/प्रसिद्ध भागवताचार्य डा. नवीन चन्द्र जोशी के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत कल्याणकारी और अद्भुत ‘रवि पुष्य योग’ का महासंयोग बन रहा है। उन्होंने बताया कि धनतेरस से ठीक पहले और अहोई अष्टमी व्रत के पावन दिन बन रहा यह दुर्लभ योग जातकों के जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव और धन-धान्य की वृद्धि लेकर आएगा।
नए व्यापार और निवेश की नींव रखने का सर्वोत्तम अवसर
डा. नवीन चन्द्र जोशी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को सर्वार्थ सिद्धि प्रदाता माना गया है। रविवार के दिन इस नक्षत्र का संयोग इसे अत्यंत शक्तिशाली बना देता है। किसी भी नए प्रतिष्ठान का उद्घाटन, नया व्यवसाय शुरू करना या किसी दीर्घकालिक योजना की नींव रखने के लिए यह दिन अति उत्तम रहेगा।
खरीदारी का अबूझ मुहूर्त
भागवताचार्य डा. जोशी के अनुसार, रवि पुष्य योग खरीदारी के लिए स्वयं सिद्ध यानी ‘अबूझ मुहूर्त’ होता है। इस दिन की गई खरीदारी में स्थायित्व रहता है और वह धन वृद्धि का कारक बनती है। इस शुभ दिन पर:
- स्वर्ण व आभूषण: समृद्धि और आर्थिक संपन्नता में वृद्धि करते हैं।
- वाहन, भूमि व मकान: स्थायी संपत्ति के निर्माण व क्रय-विक्रय के लिए श्रेष्ठ समय है।
- काष्ठोपकरण: घर या कार्यालय हेतु लकड़ी का फर्नीचर व अन्य उपयोगी उपकरण खरीदना विशेष फलदायी रहता है।
सूर्य उपासना और आदित्य हृदय स्तोत्र से मिटेंगे कष्ट
डा. जोशी ने श्रद्धालुओं को परामर्श दिया कि इस पावन अवसर पर भगवान सूर्य नारायण की विधि-विधान से आराधना अवश्य करें। इस दिन अर्घ्य देकर ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करने से शारीरिक कष्टों, असाध्य रोगों, मानसिक तनाव और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है तथा यश, प्रतिष्ठा व तेज की प्राप्ति होती है।
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