हर रंग कहेगा कहानी, हर प्रस्तुति बयां करेगी विरासत; ‘संस्कार 2026’ में दिखी भारत की सांस्कृतिक आत्मा
सप्त रंगों की थीम पर विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से दिखाई भारतीय संस्कृति की विविधता, सांसद अजय भट्ट ने दिया संस्कारों और नशामुक्त जीवन का संदेश
हल्दूचौड़। रिम्पी बिष्ट रंगों की अपनी भाषा होती है और संस्कृति की अपनी पहचान। जब इनका संगम विद्यार्थियों की प्रतिभा से हुआ तो भारतीय विरासत के विविध रंग एक ही मंच पर जीवंत हो उठे। चिल्ड्रन्स एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गोपीपुरम की इकाई ‘ला इन्फैंसिया’ की ओर से शनिवार को कृष्ण स्वरूप मेमोरियल सभागार में ‘संस्कार 2026 : द कल्चरल ‘कलाइडोस्कोप’ का भव्य आयोजन किया गया। सप्त रंगों की अवधारणा पर आधारित समारोह में विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों की सभ्यता, संस्कृति और लोक परंपराओं को आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नैनीताल-उधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट, विद्यालय के निदेशक श्रीष पाठक, प्रधानाचार्या एवं अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यकारी निदेशक प्रियांशी पाठक ने अतिथियों एवं अभिभावकों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता मनोज साहनी, समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल, पत्रकार बी.सी. भट्ट सहित प्रवीण रौतेला, कात्यायन रौतेला, अनिल जोशी, सत्यवीर त्यागी, आर्यन चौधरी ,हरेंद्र असगोला, नीरज जोशी, पूजा बिष्ट तथा रुक्मणी नेगी ग्राम प्रधान , रिंपी बिष्ट एवं पवन पाठक को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया।
‘सप्त सुर, सप्त रंग’ की संकल्पना के साथ विद्यार्थियों ने ‘वायलेट ऑर्किड’, ‘आलोर उत्सव’, ‘बैकवाटर बीट्स’, ‘रो, रो, रो योर बोट’, ‘मस्टर्ड मैजिक’, ‘सनसेट स्विर्ल’ और ‘बुरांश बहार’ जैसी प्रस्तुतियों से देश के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक पेश की। हर प्रस्तुति में विद्यार्थियों की रचनात्मकता और सामूहिक सहभागिता दिखाई दी। कार्यक्रम का संचालन तनु श्रीवास्तव और मानवी थापा ने किया।

विद्यालय के निदेशक श्रीष पाठक ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे में विशेष प्रतिभा और असीम संभावनाएं होती हैं। उन्होंने आयोजन की सफलता में शिक्षकों के योगदान और अभिभावकों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य अतिथि सांसद अजय भट्ट ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन में संस्कारों की पहली नींव परिवार में पड़ती है और माता-पिता ही उनकी पहली पाठशाला होते हैं। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं संस्कारवान जीवन अपनाने का आह्वान किया। देवभूमि उत्तराखंड के इष्ट देवी-देवताओं, लोककथाओं और अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से उन्होंने उपस्थित लोगों को प्रेरक संदेश दिए। उनके संबोधन का उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
समारोह की अंतिम प्रस्तुति ‘स्पिन द ‘कलाइडोस्कोप’ ने सप्त रंगों की मूल संकल्पना को खूबसूरती से साकार किया। अंत में निदेशक श्रीष पाठक ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट किया ।छात्रा आराध्या सैनी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
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