रात के अंधेरे में चमकती खूंखार आँखें… बिंदुखत्ता में बाघ की दहशत, कई मवेशी बने निवाला; खौफ के साए में ग्रामीण

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लालकुआं। बिंदुखत्ता के इंद्रानगर प्रथम क्षेत्र में इन दिनों सन्नाटा पसरते ही खौफ का पहरा बैठ जाता है। माँ नंदा सुनंदा मंदिर से विकासपुरी मार्ग की ओर आबादी के मुहाने पर मंडराते एक खूंखार शिकारी की आहट ने पूरे इलाके की नींद उड़ा दी है। बाघ की लगातार सक्रियता से ग्रामीण इस कदर सहमे हुए हैं कि शाम ढलते ही घरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं और बच्चों-महिलाओं का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है।
दहशत की यह दास्तान तब और खौफनाक हो गई जब 13 अगस्त की रात करीब 10 बजे अजय सिंह अपने साथी के साथ घर लौट रहे थे। सुनसान रास्ते पर अचानक उनका सामना साक्षात मौत यानी बाघ से हो गया। दोनों ने सूझबूझ दिखाते हुए शोर मचाया, जिससे बाघ जंगल की ओर भाग गया और एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, यह शिकारी अब तक हेमा पांडे की गाय की बछिया व एक पालतू कुत्ते, कविता जोशी के दो कुत्तों और गोविंद सिंह बिष्ट के एक पालतू कुत्ते को अपना निवाला बना चुका है।

खतरे को भांपते हुए दिनेश जोशी, अजय सिंह, हेमा पांडे, कविता जोशी, गोविंद सिंह बिष्ट, नीमा भोजक, राम सिंह कुंदर और विक्रम डोबाल समेत समस्त ग्रामीणों ने प्रभागीय वनाधिकारी (तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी) को प्रार्थना पत्र भेजा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि किसी बड़ी मानवीय अनहोनी से पहले आबादी क्षेत्र में तुरंत पिंजरा लगाया जाए और शाम-रात के समय नियमित वन गश्त शुरू की जाए।

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मामले पर वन क्षेत्राधिकारी (गोला) चंदन सिंह अधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके का मुआयना कर क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से जानवर की प्रत्यक्ष आवाजाही नहीं दिखी है, लेकिन शिकारी की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिसके आधार पर आगे की ठोस कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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