ऋषिकेश / हरिद्वार
वर्ष 2027 में जब धर्मनगरी हरिद्वार की पावन धरा पर महाकुंभ का विहंगम दृश्य सजेगा और करोड़ों श्रद्धालु गंगा की पावन धारा में डुबकी लगाएंगे, तब उसी पुण्य भूमि पर एक ऐसा महायज्ञ भी आकार लेगा जो केवल आस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंधकार में डूबी अनगिनत जिंदगियों को नई रोशनी से भर देगा।
क्या है यह विराट प्रकल्प और किस तरह गंगा के तट पर दृष्टिहीनता के विरुद्ध इतिहास रचा जाएगा? इसका ताना-बाना बुनने के लिए समदृष्टि क्षमताविकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम) ने अपनी कमर कस ली है। हरिद्वार कुंभ 2027 के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘पंचम नेत्र कुंभ’ की रूपरेखा तय करने हेतु परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के शांत और आध्यात्मिक वातावरण में एक विशेष तैयारी बैठक संपन्न हुई।
दृष्टि के साथ अंतर्दृष्टि जगाने का संकल्प
गंगा तट पर आयोजित इस बैठक का वातावरण सेवा और समर्पण के भाव से सराबोर रहा। बैठक को स्वामी चिदानंद महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। स्वामी चिदानंद महाराज ने सक्षम द्वारा समाज के वंचित और दिव्यांग वर्ग के उत्थान के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दिव्यांग सेवा ही वास्तव में सच्ची राष्ट्र सेवा है। यह केवल एक चिकित्सकीय उपक्रम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय कर्तव्य का प्रकटीकरण है।
बैठक में सक्षम के राष्ट्रीय संगठन मंत्री चंद्रशेखर ने नेत्र कुंभ के गूढ़ उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सक्षम का लक्ष्य केवल बाह्य दृष्टि प्रदान करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के भीतर उस अंतर्दृष्टि को जाग्रत करना है जिससे वह आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके।

बैठक की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन के सचिव डॉ अनुज सिंघल ने की, जबकि पूरे कार्यक्रम को उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री देवेंद्र का मार्गदर्शन मिला।
पांच चरणों में पूरा होगा यह महाभियान: पूरी समय-सारणी
नेत्र कुंभ 2027 को सुव्यवस्थित, भव्य और परिणामोन्मुख बनाने के लिए इसे पांच सुनियोजित चरणों में विभक्त किया गया है। राष्ट्रीय संगठन मंत्री चंद्रशेखर ने इस महाअभियान के चरणों की आधिकारिक घोषणा की:
* शंखनाद (प्रथम चरण): 22 नवंबर 2026 को इस विशाल सेवा अभियान का औपचारिक उद्घोष होगा।
* भूमि पूजन (द्वितीय चरण): 13 दिसंबर 2026 को अनुष्ठानिक भूमि पूजन के साथ आयोजन स्थल पर निर्माण कार्य आरंभ होगा।
* भव्य उद्घाटन (तृतीय चरण): 12 जनवरी 2027 को स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर नेत्र कुंभ का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा।
* महासमापन (चतुर्थ चरण): 25 फरवरी 2027 को सेवा कार्यों के विस्तृत दौर के उपरांत मुख्य आयोजन का समापन होगा।
* आभार एवं अभिनंदन समारोह (पंचम चरण): 18 अप्रैल 2027 को सभी सहयोगी चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और संगठनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
विचार-मंथन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सहभागिता
तैयारी बैठक में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस पांच-चरणीय योजना पर अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की। साथ ही नेत्र परीक्षण, शल्य चिकित्सा, आवास, भोजन और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के उपयोग को लेकर व्यावहारिक सुझाव साझा किए गए।
इस विचार-मंथन सत्र में चिकित्सा जगत और सामाजिक क्षेत्र के अनेक प्रमुख व्यक्तित्व सम्मिलित रहे। प्रमुख रूप से:
* अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विभागाध्यक्ष डॉ संजीव मित्तल
* स्वास्थ्य निदेशालय उत्तराखंड के अपर निदेशक डॉ महेश खेतान एवं डॉ रितु खेतान
* आयुर्वेद महाविद्यालय हरिद्वार के डॉ राजीव खुरले
* सक्षम के प्रांत सचिव कपिल रतूड़ी, प्रांत सह सचिव अनंत प्रकाश मेहरा एवं प्रांतीय युवा प्रमुख कमल पंत
* सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद गुप्ता
* परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के प्रतिनिधि अरुण शाश्वत
* दिव्य प्रेम सेवा मिशन (चंडीघाट, हरिद्वार) के विश्वास शर्मा एवं गगन यादव
* सामाजिक प्रतिनिधि मोनू त्यागी (हरिद्वार), योगेश पंत (बागेश्वर) और भूपाल लोहानी (गाजियाबाद)
बैठक के समापन सत्र में सक्षम के उत्तराखंड प्रांत अध्यक्ष ललित पंत ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास दिलाया कि उत्तराखंड की यह देवभूमि 2027 के महाकुंभ में सेवा, समर्पण और दृष्टिदान का एक ऐसा अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करेगी जो पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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