भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री ने दीपेन्द्र कोश्यारी ने कहा कि श्री रामकथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिकता, श्रद्धा और संस्कृति के आदर्शों को जीवित रखने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इस प्रकार की कथाओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान उनके साथ हुई बातचीज के प्रमुख अंश
प्रश्न 1: लालकुआँ में आयोजित श्रीराम कथा में आकर आपको कैसा अनुभव हो रहा है?
उत्तर: यह मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य और आत्मिक आनंद का विषय है। श्रीराम कथा के श्रवण से मन को शांति, संस्कार और जीवन की सही दिशा मिलती है। यहां का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत है।
प्रश्न 2: आज के युवा वर्ग के लिए श्रीराम कथा कितनी प्रासंगिक है?
उत्तर:आज का युवा तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन उसे दिशा और संस्कार भी चाहिए। श्रीराम का जीवन चरित्र युवाओं को कर्तव्य, संयम, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। राम कथा युवाओं के लिए चरित्र निर्माण की पाठशाला है।
प्रश्न 3: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के कौन से गुण आपको सबसे अधिक प्रेरित करते हैं?
उत्तर:श्रीराम का पिता-माता के प्रति आदर, भाईयों के प्रति प्रेम, प्रजा के प्रति उत्तरदायित्व और सत्य के लिए त्याग—ये सभी गुण आज के समाज के लिए आदर्श हैं। उनका पूरा जीवन “कर्तव्य पहले, स्वयं बाद में” का संदेश देता है।
प्रश्न 4: राधे-राधे सेवा समिति द्वारा आयोजित इस रामकथा के बारे में आपका क्या कहना है?
उत्तर:राधे-राधे सेवा समिति ने अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं, संस्कारों को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
प्रश्न 5: कथा व्यास डा० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ के प्रवचन पर आपकी प्रतिक्रिया?
उत्तर:डा० पंकज मिश्रा जी का कथन सरल, भावपूर्ण और हृदय को स्पर्श करने वाला है। वे रामकथा को केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन दर्शन के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे श्रोता आत्ममंथन के लिए प्रेरित होता है।
प्रश्न 6: समाज और राष्ट्र के लिए श्रीराम कथा का क्या महत्व है?
उत्तर:श्रीराम कथा समाज में नैतिकता, समरसता और राष्ट्रभक्ति को मजबूत करती है। जब व्यक्ति का चरित्र मजबूत होता है, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बनता है। रामराज्य की अवधारणा आज भी प्रासंगिक है।
प्रश्न 7: आप श्रद्धालुओं और युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर:मैं सभी से आग्रह करूंगा कि वे श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। राम कथा सुनना ही नहीं, उसे जीना ही सच्ची भक्ति है। यही मार्ग हमें व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर ऊँचाई तक ले जाएगा।
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