कवि केवल शब्दों के निर्माता नहीं, बल्कि समाज के चिंतक और मार्गदर्शक होते हैं: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
रामनगर/कालाढूंगी, 06 जून 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को तहसील कालाढुंगी के नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट धनपुर धमोला पहुंचकर ललित फाउंडेशन के पांचवें अधिवेशन “अभिव्यंजना 5.0” का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस गरिमामयी अवसर पर देश के कई प्रख्यात कवि और साहित्यकार उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक कवि सम्मेलन नहीं है, बल्कि विचारों, भावनाओं और सृजनशीलता को गहराई से महसूस करने का एक अभिनव अवसर है। उन्होंने कवियों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि कवि केवल शब्दों के निर्माता नहीं होते, बल्कि वे समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। कवि की रचनाएं समाज को दर्पण दिखाने का काम करती हैं। जब भी समाज उलझनों से घिरता है, तब कवि अपनी लेखनी से उसे न केवल नई दिशा दिखाता है, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास भी करता है। इतिहास साक्षी है कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को भी तभी गति मिली जब हमारे कवियों और साहित्यकारों ने अपनी कालजयी रचनाओं से देशवासियों में क्रांति की अलख जगाई। आज देश के ऐसे ही राष्ट्रभक्त और विशिष्ट कवियों का संगम यहाँ उपस्थित है, जिनकी वाणी में प्रेम, विरह, विद्रोह, देशभक्ति, हास्य और भक्ति का अद्भुत समन्वय है।
मंच पर मौजूद दिग्गज रचनाकारों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर जहां डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से कविता को वैश्विक मंचों पर नई पहचान दी है, वहीं पद्मश्री अशोक चक्रधर की रचनाएँ हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं। इसके साथ ही डॉ. हरिओम पंवार की ओजस्वी कविताएँ राष्ट्रभक्ति और जनचेतना की ऐसी सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जो हर श्रोता को ऊर्जा और नई प्रेरणा से भर देती हैं। इन सभी मनीषियों ने कविताओं को विशिष्ट मंचों से निकालकर जन-जन तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया है और युवाओं को साहित्य से जोड़ने में सराहनीय भूमिका निभाई है।
देवभूमि की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से साहित्य, संस्कृति और सृजन की पावन भूमि रही है। हिमालय की गोद में बसी इस धरती ने अनेक ऐसे महान साहित्यकार, कवि और लोकचिंतक दिए हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज को नई दिशा दी। उन्होंने गर्व से सुमित्रानंदन पंत की प्रकृति-साधना, चंद्रकुंवर बर्त्वाल की काव्य चेतना, गिर्दा की जन सरोकारों को उठाती रचनाएं, शैलेश मटियानी द्वारा उत्तराखंडी लोकजीवन का सजीव चित्रण, गौरा पंत ‘शिवानी’ की अनन्य साहित्य-साधना और मोहन उप्रेती द्वारा लोक संस्कृति के संरक्षण के अद्भुत प्रयासों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की यह गौरवशाली साहित्यिक परंपरा आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण की निरंतर प्रेरणा दे रही है।
इस भव्य समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने समाज और साहित्य के क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य कर रहे कवि, कवित्रियों एवं साहित्यकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मात्र व्यक्तियों का नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली प्रगतिशील सोच का सम्मान है। उन्होंने सम्मानित होने वाले सभी समाजसेवियों और साहित्यकारों को हार्दिक बधाई दी। साथ ही, उन्होंने इस साहित्य संगम को एक नई चेतना, नई ऊर्जा और अपने “विकल्प रहित संकल्प” के साथ आगे लेकर जाने का आह्वान किया।
इस गौरवमयी अवसर पर कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत, प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री अशोक चक्रधर, डॉ. हरिओम पवार सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवि, साहित्यकार और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आईआरबी बेलपड़ाव, रामनगर पहुंचने पर विधायक बंशीधर भगत, बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, उपाध्यक्ष गणेश रावत, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, शंकर कोरंगा, सुरेंद्र नामधारी, हुकुम सिंह कुँवर, आयोग के सदस्य ज़ेडए वारसी, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी और मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। हेलीपैड पर मुख्यमंत्री ने आईआरबी जवानों के बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे स्नेहपूर्वक वार्ता कर उनका हौसला बढ़ाया।
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