बहराइच (शैल शक्ति ब्यूरो):
बहराइच की पावन धरा पर इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व एक अद्भुत और अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति लेकर आ रहा है। माँ पीताम्बरी के अनन्य भक्त एवं सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने आगामी 29 जुलाई को आयोजित होने वाले विशेष धार्मिक अनुष्ठान को लेकर भक्तों के समक्ष एक बड़ा आध्यात्मिक संदेश दिया है। उन्होंने समस्त श्रद्धालुओं और शिष्यों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उनके यशस्वी, दीर्घायु और मंगलमय जीवन का आशीर्वाद दिया है। पूज्य गुरुजी ने कहा कि जो भक्त सच्चे भाव से शक्ति की साधना में समर्पित रहता है, उस पर माई पीताम्बरी की अनुकंपा सदैव बरसती रहती है।
जन-कल्याण और विश्व शांति के पावन संकल्प के साथ आगामी 29 जुलाई को पवित्र राप्ती नदी के तट पर एक भव्य महा-हवन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस अनुष्ठान में दी जाने वाली पावन आहुतियों के माध्यम से वातावरण में दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा, जिससे श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण होगा। गुरुजी ने बताया कि राप्ती तट पर होने वाला यह हवन केवल एक अनुष्ठान मात्र नहीं, बल्कि माँ पीताम्बरी की प्रत्यक्ष अनुकंपा प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर है।
**गुरु एवं गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व**
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी उच्च माना गया है। अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के दिव्य प्रकाश की ओर ले जाने वाली परम चेतना का नाम ही गुरु है। शास्त्रों के अनुसार गुरु वह सामर्थ्य हैं जो शिष्य की सुप्त आत्मा को जागृत कर उसे जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताते हैं। गुरु पूर्णिमा का यह पावन अवसर केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने सद्गुरु के प्रति अनन्य कृतज्ञता, समर्पण और भक्ति व्यक्त करने का दिन है। इस दिन गुरु चरणों में अर्पित की गई श्रद्धा साधक के जीवन के समस्त विघ्नों को हरकर उसे सन्मार्ग की ओर अग्रसर करती है।
**माँ पीताम्बरी की असीम महिमा**
दशमहाविद्याओं में भगवती पीताम्बरी का रूप अत्यंत विलक्षण और कल्याणकारी माना गया है। माई पीताम्बरी अपने भक्तों के जीवन से भय, संकट, रोग और शत्रुओं का नाश कर उन्हें अभय प्रदान करती हैं। जो साधक निष्काम भाव से पीताम्बरी माई के चरणों में आश्रय लेता है, उसके जीवन में असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। पूज्य विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी के अनुसार, माई की कृपा उस बहती हुई मंदाकिनी के समान है जो हर उस हृदय को पवित्र कर देती है जहाँ निष्छल भक्ति और अटूट विश्वास वास करता है।
राप्ती नदी के पवित्र किनारे आयोजित होने वाले इस दिव्य हवन और महा-भंडारे में सम्मिलित होने के लिए सभी धर्मप्रेमी बंधुओं को सादर आमंत्रित किया गया है। गुरुजी ने सभी शिष्यों का आह्वान किया है कि वे इस पावन तिथि पर भक्ति और साधना का दीप जलाकर माँ पीताम्बरी एवं गुरुसत्ता के आशीर्वाद से अपने जीवन को कृतार्थ करें।
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