“श्रीराम कथा केवल कथा नहीं, जीवन जीने की कला है” डॉ. पंकज मिश्र ‘मयंक’ से विशेष बातचीत

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लालकुआँ में चल रही श्री राम कथा ने आध्यात्म की अद्भूत छटा बिखेरी है इस दौरान प्रसिद्ध कथा वाचक डा० पंकज मिश्रा से हुई बातचीज के प्रमुख अंश

“श्रीराम कथा केवल कथा नहीं, जीवन जीने की कला है”
डॉ. पंकज मिश्र ‘मयंक’ से विशेष बातचीत

प्रश्न: डॉ. पंकज मिश्र जी, श्री राम कथा का मूल उद्देश्य आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: श्री राम कथा मानव जीवन के लिए एक आदर्श आचार संहिता है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा, त्याग और करुणा का मार्ग दिखाता है। यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है।

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प्रश्न: आज के युग में श्री राम कथा की प्रासंगिकता कितनी है?
उत्तर: आज जब समाज भटकाव, तनाव और वैचारिक भ्रम से जूझ रहा है, तब श्री राम कथा दिशा देने वाला दीपक है। रामराज्य की कल्पना केवल शासन की नहीं, बल्कि न्याय, समरसता और लोककल्याण की अवधारणा है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

प्रश्न: युवा पीढ़ी श्री राम कथा से क्या सीख ले सकती है?
उत्तर: युवा यदि श्रीराम से कुछ सीख लें तो वह है :
कर्तव्यनिष्ठा, संयम और सम्मान।
श्रीराम ने हर परिस्थिति में धर्म का पालन किया। आज के युवाओं को यह समझना होगा कि सफलता का मार्ग अनुशासन से होकर जाता है।

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प्रश्न: माता सीता और हनुमान जी के चरित्र को आप कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर: माता सीता धैर्य, शील और शक्ति की प्रतीक हैं, जबकि हनुमान जी भक्ति, सेवा और निःस्वार्थ समर्पण का जीवंत उदाहरण हैं। श्री राम कथा इन दोनों आदर्शों के बिना अधूरी है।

प्रश्न: कथा श्रवण से व्यक्ति के जीवन में क्या परिवर्तन आता है?
उत्तर: श्री राम कथा का श्रवण चित्त को शुद्ध करता है। इससे मन में शांति, विचारों में स्थिरता और व्यवहार में सौम्यता आती है। यह आत्मिक उत्थान का मार्ग है।

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प्रश्न: समाज के लिए आपका संदेश क्या है?
उत्तर: मेरा यही संदेश है कि घर-घर राम हों, विचारों में राम हों। यदि हम राम के आदर्शों को अपने व्यवहार में उतार लें, तो समाज स्वतः ही सुंदर, सुरक्षित और संस्कारित बन जाएगा।

विशेष
डॉ. पंकज मिश्र ‘मयंक’ की वाणी में शास्त्र का गाम्भीर्य और अनुभव की सरलता स्पष्ट झलकती है। उनकी श्री राम कथा केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सशक्त माध्यम है।

“राम कथा—आस्था भी, आदर्श भी और आत्मा का आलोक भी।”

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