संवाददाता बहराइच भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होकर सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या तक चलने वाले महालय (पितृ पक्ष) के पावन दिनों में जहाँ सामान्यतः केवल तर्पण और पिण्डदान की चर्चा होती है, वहीं इस बार एक ऐसे गूढ़ आध्यात्मिक सत्य से पर्दा उठा है जो कुल के भाग्य को बदलने का सामर्थ्य रखता है। माँ बगलामुखी के अनन्य आराधक एवं सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने पितृ पक्ष में भगवती पीताम्बरा के दिव्य पूजन का वह गोपनीय मर्म उद्घाटित किया है, जो अब तक आम जनमानस की दृष्टि से ओझल था।
गुरुजी के अनुसार, जीवन में अनवरत आने वाली बाधाएं, पारिवारिक अशांति और संतानों की प्रगति में रुकावट केवल प्रारब्ध नहीं, बल्कि कई बार अतृप्त पूर्वजों की अनकही पीड़ा का संकेत होती हैं। इस पीड़ा और पितृ दोष की बेड़ियों को काटने की अचूक शक्ति केवल दस महाविद्याओं की स्तम्भन अधिष्ठात्री माँ बगलामुखी के पास है।
जब पूर्वजों के मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती हैं पीताम्बरा
सत्य साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने भक्तों को मार्गदर्शन देते हुए बताया कि आगम और तन्त्र ग्रंथों में माँ बगलामुखी को ‘प्रज्वलित पितृ-भूमि’ अर्थात समस्त बंधनों को भस्म कर परम गति देने वाली पराशक्ति कहा गया है। गुरुजी ने रेखांकित किया कि पितृ पक्ष केवल जल अर्पित करने की रस्म नहीं, बल्कि पीढ़ियों के संचित कर्म-बंधनों से मुक्ति पाने का दुर्लभ अवसर है। जब किसी परिवार में अकाल मृत्यु या किसी पूर्वज की अतृप्त वासना के कारण कुल संकट में होता है, तब माँ बगलामुखी का ‘ब्रह्मास्त्र’ स्वरूप उन समस्त अदृश्य नकारात्मक तरंगों का स्तम्भन कर देता है। माँ की कृपा दृष्टि पड़ते ही पितरों को उच्च लोकों में स्थान मिलता है और वे तृप्त होकर अपने वंशजों को अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं।
सरस और सात्त्विक आराधना से खुलते हैं सुख-समृद्धि के द्वार
भक्तों की शंकाओं का समाधान करते हुए गुरुजी ने स्पष्ट किया कि पितृ पक्ष में भगवती की उपासना किसी उग्र प्रयोग के लिए नहीं, अपितु पूर्णतः वात्सल्यमयी और सात्त्विक भाव से की जानी चाहिए। उन्होंने अत्यंत सरल और सुलभ विधि साझा करते हुए कहा:
- दोपहर में पितरों के नाम से जल-तिल अर्पण करने के उपरांत संध्या काल में माँ के सम्मुख पीले वस्त्र धारण कर बैठें।
- माँ को हल्दी, पीला चंदन, कनेर अथवा गेंदे के पीले पुष्प और बेसन की मिष्ठान्न का भोग अर्पित करें।
- हृदय में यह पावन संकल्प धारण करें कि यह पूजा स्वयं के किसी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि कुल के समस्त ज्ञात-अज्ञात पितरों की आत्मिक शांति और तृप्ति के लिए है।
- हल्दी की माला से माँ के बीज मंत्र अथवा महामंत्र का शांत और एकाग्र मन से जप करें।
साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने संदेश दिया कि जहाँ श्रद्धा और सत्य का वास होता है, वहाँ माँ बगलामुखी स्वयं रक्षक बनकर खड़ी हो जाती हैं। पितृ पक्ष में माँ की यह सरस और सहज साधना न केवल पूर्वजों को भवसागर से पार लगाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के आंगन में भी सुख, शांति और समृद्धि की अविरल धारा प्रवाहित कर देती है।
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