अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और संकल्प का साकार स्वरूप: स्वर्गीय पूरन सिंह रजवार की अंतिम अभिलाषा बनी ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक

ख़बर शेयर करें

 

अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और संकल्प का साकार स्वरूप: स्वर्गीय पूरन सिंह रजवार की अंतिम अभिलाषा बनी ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक

लालकुआँ।
कुछ व्यक्तित्व अपने कर्म, अपनी श्रद्धा और अपने संकल्पों के कारण समय की सीमाओं से परे अमर हो जाते हैं। वे भले ही इस नश्वर संसार से विदा हो जाएँ, किंतु उनके सपने, उनके आदर्श और उनकी भावनाएँ समाज के हृदय में सदैव जीवित रहती हैं। ऐसा ही एक अत्यंत भावुक, अविस्मरणीय और श्रद्धा से परिपूर्ण क्षण उस समय देखने को मिला, जब माँ अवंतिका मंदिर के पूर्व अध्यक्ष, दिवंगत श्रद्धालु स्वर्गीय श्री पूरन सिंह रजवार की प्रेरणा और संकल्प से लिखित पावन पुस्तक ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती दुर्गा देवी रजवार को ससम्मान भेंट किया गया।

यह केवल एक पुस्तक का हस्तांतरण नहीं था, बल्कि एक दिवंगत श्रद्धालु की उस पवित्र अभिलाषा का साकार रूप था, जिसे उन्होंने जीवन भर अपने हृदय में संजोए रखा। माँ अवंतिका मंदिर के मुख्य आचार्य पंडित चन्द्रशेखर जोशी ने जब अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ यह पुस्तक श्रीमती दुर्गा देवी रजवार को समर्पित की, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उनकी आँखों से बहते अश्रु केवल विरह के नहीं थे, बल्कि उस संतोष और गर्व के भी थे कि उनके जीवनसाथी का स्वप्न आज पूर्णता को प्राप्त हो चुका है।

यह भी पढ़ें 👉  अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर देवभूमि विज्ञान समिति की अनूठी पहल, लालकुआं व्यापार मंडल को भेंट किए गए इनडोर पौधे और गमले

इस अवसर का सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब परिवारजनों ने इस पावन ग्रंथ को सबसे पहले स्वर्गीय पूरन सिंह रजवार के चित्र के चरणों में अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उस क्षण वातावरण श्रद्धा, स्मृतियों और भावनाओं से ऐसा सराबोर हो उठा कि उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की आँखें नम हो गईं। मानो स्वयं स्वर्गीय रजवार जी अदृश्य रूप से वहाँ उपस्थित होकर अपने संकल्प को पूर्ण होते देख रहे हों।

इस भावनात्मक अवसर के साक्षी उनके पुत्र रघुबीर रजवार, विनय रजवार तथा परिवार के अन्य सदस्य बने। पिता की वर्षों पुरानी इच्छा को मूर्त रूप लेते देख उनके चेहरों पर गर्व, सम्मान और भावुकता का अद्भुत संगम दिखाई दिया। यह केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि माँ अवंतिका के सभी भक्तों के लिए भी एक प्रेरणादायी क्षण था।

यह भी पढ़ें 👉  सांसद अजय भट्ट ने सपरिवार किए प्रभु श्रीरामलला के दिव्य दर्शन, देश और प्रदेशवासियों की खुशहाली की मांगी मन्नत

स्वर्गीय पूरन सिंह रजवार माँ अवंतिका के अनन्य उपासक थे। मंदिर के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सदैव मंदिर के विकास, संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य किया। उनकी हार्दिक इच्छा थी कि माँ अवंतिका की दिव्य महिमा, प्राचीन इतिहास, आध्यात्मिक महत्व और लोकआस्था को एक पुस्तक के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस महान शक्ति पीठ की गौरवगाथा से परिचित हो सकें।

उनके इसी दिव्य संकल्प का परिणाम है ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’, जो केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति, इतिहास और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। यह ग्रंथ माँ अवंतिका की महिमा को विश्वभर के श्रद्धालुओं तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा और साथ ही स्वर्गीय पूरन सिंह रजवार की निष्ठा, समर्पण और सेवा-भाव की अमिट स्मृति के रूप में सदैव याद किया जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  श्रद्धा और सेवा का संगम: मां अवंतिका मंदिर में राधे राधे सेवा समिति ने चलाया स्वच्छता अभियान, भक्तों को कराया जलपान

उल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण धार्मिक पुस्तक का भव्य विमोचन हाल ही में सेंचुरी मिल के सीईओ अजय गुप्ता तथा उपाध्यक्ष नरेश चन्द्रा द्वारा किया गया था। विमोचन के उपरांत इस पुस्तक को स्वर्गीय रजवार जी के परिवार तक पहुँचाने की प्रतीक्षा थी, जो अब अत्यंत श्रद्धा और भावनात्मक गरिमा के साथ पूर्ण हुई।

यह अवसर केवल एक पुस्तक भेंट करने का नहीं था, बल्कि एक महान श्रद्धालु की स्मृतियों को नमन करने, उनके अधूरे स्वप्न को पूर्ण करने और माँ अवंतिका के चरणों में समर्पित उनके जीवन को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने का था। निस्संदेह, ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ आने वाली पीढ़ियों को माँ की महिमा से जोड़ने के साथ-साथ स्वर्गीय पूरन सिंह रजवार के अमर संकल्प और उनकी अविचल भक्ति की प्रेरणादायी गाथा भी सुनाती रहेगी।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad