कैलाश मानसरोवर यात्रा पथ पर गूंजी लालकुआँ की महिमा: काली नदी के उद्गम स्थल पर माँ काली को भेंट की गई ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक
लालकुआँ क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर रेखांकित करने वाली पुस्तक ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ ने एक और अभूतपूर्व आध्यात्मिक उपलब्धि हासिल की है। लालकुआँ के धार्मिक गौरव और जन-आस्था को समर्पित इस पावन कृति को पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित, काली नदी के पावन उद्गम स्थल पर बने ऐतिहासिक माँ काली मंदिर में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भेंट किया गया है। मुख्य रूप से लालकुआँ स्थित माँ अवंतिका मंदिर को केंद्र में रखकर लिखी गई इस शोधपरक पुस्तक का हिमालय की इस महान आध्यात्मिक चेतना और उद्गम तीर्थ से जुड़ना पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय बन गया है।
उल्लेखनीय है कि इस वैचारिक और धार्मिक पुस्तक का भव्य विमोचन विगत 30 मई को आयोजित एक गरिमामयी समारोह में सेंचुरी मिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अजय कुमार गुप्ता के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ था, जिसमें सेंचुरी मिल के उपाध्यक्ष श्री नरेश चन्द्रा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने इस कृति की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे क्षेत्र के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण के लिए एक अत्यंत सराहनीय कदम बताया था। अब कैलाश यात्रा पथ पर माँ काली के चरणों में इस पुस्तक के समर्पित होने से स्थानीय बुद्धिजीवियों, धार्मिक विचारकों और आम जनमानस में भारी हर्ष व्याप्त है। निश्चित रूप से यह पावन प्रयास न केवल माँ अवंतिका के प्रति भक्तों की अगाध श्रद्धा को नई ऊंचाई देगा, बल्कि कैलाश यात्रा मार्ग से गुजरने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं तक भी लालकुआँ की पावन धरा की महिमा और इसके प्राचीन सांस्कृतिक वैभव की गूंज को प्रभावी ढंग से पहुंचाएगा।
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