लालकुआँ। देवशयनी एकादशी की पावन संध्या पर लालकुआँ स्थित माँ अवंतिका शक्तिपीठ का प्रांगण एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य का साक्षी बना। चारों ओर गूँजते वैदिक मंत्र, शंखध्वनि और दीपों की जगमगाती शृंखला ने ऐसा वातावरण निर्मित किया, मानो देवलोक स्वयं धरातल पर उतर आया हो। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने जगत्पति भगवान विष्णु और भगवती माँ अवंतिका के चरणों में दीप अर्पित कर देश व प्रदेश की खुशहाली, शांति और आरोग्य की कामना की।
भारतीय संस्कृति में दीप प्रज्वलन को केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार माना गया है। इसी महिमा को प्रकट करता संस्कृत का यह पावन श्लोक इस दिव्य वातावरण को और भी पवित्र बना रहा था:
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
अर्थात्, कल्याण, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करने वाली तथा अज्ञान रूपी शत्रुबुद्धि का नाश करने वाली दीप ज्योति को बारंबार प्रणाम है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के उपाध्यक्ष नरेश चन्द्रा ने विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत दीप यज्ञ में सहभागिता की और अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा की। उन्होंने दीप यज्ञ के दर्शन को अत्यंत सरल और सारगर्भित शब्दों में व्यक्त करते हुए कहा कि दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, यही सेवा और समर्पण का मूल मंत्र है। दीप यज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे अंतःकरण के अंधकार को दूर कर समाज में सद्भाव, शांति और सकारात्मक चेतना की नई लौ जलाने का एक दिव्य माध्यम है। जब सैकड़ों दीप एक साथ प्रज्वलित होते हैं, तो उनका सामूहिक संकल्प संपूर्ण वातावरण को ऊर्जावान और पवित्र बना देता है।
दीप ज्योति के इस अलौकिक महत्व को रेखांकित करता एक और पावन श्लोक यहाँ चरितार्थ होता दिखा:
दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥
अर्थात्, दीप की ज्योति ही परब्रह्म है और वही भगवान जनार्दन का स्वरूप है। यह संध्या दीप ज्योति हमारे समस्त कष्टों और पापों का हरण करे।
इस गरिमामय एवं भावपूर्ण आयोजन में माँ अवंतिका शक्तिपीठ मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खाती, मुख्य पुजारी पंडित चंद्रशेखर जोशी, भरत पांडे, रंजीत बोरा रविंद्र यादव, कमलेश यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मंत्रोच्चार के बीच दीपदान कर लोक-कल्याण की प्रार्थना की।
संध्या ढलते ही पूरा प्रांगण दीपों की असीम ज्योति से नहा उठा। कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण सामूहिक आरती, शंखनाद और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसकी मधुर अनुभूति श्रद्धालुओं के हृदय में देर तक स्पंदित होती रही।
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