जब बिखरने लगी थी दो बेटियों की दुनिया, तब अंधेरे में रोशनी बनकर कौन आया?
पंतनगर में हादसे का शिकार हुई महिला सुरक्षा गार्ड के आंसुओं को मिला संबल; युवा समाजसेवी शुभम अंडोला ने ‘हीरा एंड टी आर चैरिटेबल ट्रस्ट’ के जरिए माता-पिता के हाथों सौंपी ₹21,000 की आर्थिक मदद।
हल्दूचौड़/पंतनगर: जीवन के सफर में जब अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़े, घर की एकमात्र कमाऊ लाचार मां अस्पताल के बिस्तर पर पहुंच जाए और दो मासूम बेटियों के आगे भविष्य का अंधेरा छाने लगे—तब उस बेबसी को शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन होता है। शांतिपुरी निवासी हेमा जोशी के परिवार पर 2 सितंबर को जब सड़क हादसे का कहर टूटा, तो लगा कि जिंदगी की गाड़ी पूरी तरह थम गई। मगर कहते हैं कि जब इंसान की हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ईश्वर किसी न किसी संवेदनशील दिल को मसीहा बनाकर भेज देता है।

इस कठिन इम्तहान की घड़ी में बेसहारा परिवार की ढाल बनकर सामने आए हैं हल्दूचौड़ के युवा समाजसेवी शुभम अंडोला और उनका समर्पित संगठन ‘हीरा एंड टी आर चैरिटेबल ट्रस्ट’।
15 वर्षों का कड़ा संघर्ष और एक झटके में आई आफत
हेमा जोशी जी लगभग 15 वर्ष पूर्व अपने पति को खो चुकी थीं। दो बेटियों की परवरिश और गृहस्थी की पूरी जिम्मेदारी अकेले अपने कंधों पर उठाते हुए वे पंतनगर-नगला क्षेत्र में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर परिवार का पेट पाल रही थीं। घर में कोई दूसरा कमाने वाला नहीं था। 2 सितंबर को हुए भीषण हादसे ने न केवल उनके शरीर को जख्मी किया, बल्कि परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया।
संवेदना की मिसाल: माता-पिता के हाथों सौंपी ₹21,000 की सहायता राशि
सोमवार के पावन दिन, भगवान भोलेनाथ और मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए शुभम अंडोला ने अपने माता-पिता के पावन सानिध्य में हेमा जोशी जी की बेटी विद्या और भतीजे अमन को कार्यालय बुलाकर ₹21,000 की आर्थिक सहायता राशि सौंपी।
यह मदद केवल रुपयों का सहयोग नहीं, बल्कि उस पीड़ित परिवार को यह अटूट विश्वास दिलाना था कि इस मुश्किल वक्त में वे अकेले नहीं हैं, पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।
“किसी के दुख को कम करने से बड़ा कोई धर्म नहीं और किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लौटाने से बड़ी कोई पूजा नहीं। हमारा संकल्प ही यही है कि जहां पीड़ा होगी, वहां हम अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा का हाथ जरूर आगे बढ़ाएंगे।” — शुभम अंडोला (संस्थापक, हीरा एंड टी आर चैरिटेबल ट्रस्ट)
संस्कार और सेवा का अनूठा संगम: शुभम अंडोला की परोपकारी सोच
शुभम अंडोला ने अपने माता-पिता के नाम पर ‘हीरा एंड टी आर चैरिटेबल ट्रस्ट’ की नींव रखकर समाज को यह प्रेरणा दी है कि सच्ची सफलता दूसरों के आंसुओं को पोंछने में है। क्षेत्र में शुभम अंडोला की पहचान एक ऐसे संवेदनशील, विनम्र और कर्मठ युवा के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो पीड़ित मानवता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
चाहे किसी गरीब की बीमारी का इलाज हो, असहायों की मदद हो या सामाजिक सरोकार—शुभम अंडोला का ‘सेवा ही संकल्प, सेवा ही धर्म’ का मंत्र आज युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहा है। शुभम अंडोला ने क्षेत्रवासियों और शुभचिंतकों से आह्वान किया है कि अधिक से अधिक संख्या में इस सेवा यात्रा से जुड़ें, ताकि किसी भी जरूरतमंद की उम्मीद कभी टूटने न पाए।
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