भव्य मंच पर जब अचानक गूंजा एक नाम तो क्यों तालियों से गूंज उठा पूरा परिसर? जानिए शिक्षा और सेवा की उस मौन तपस्या की अनूठी कहानी

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शैल शक्ति ब्यूरो, हल्द्वानी

यूनिवर्सल कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रांगण में आयोजित वार्षिक उत्सव ‘अभ्युदय 2026’ अभूतपूर्व सांस्कृतिक छटा और गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन और छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। लेकिन इस पूरे भव्य आयोजन का सबसे अविस्मरणीय और संवेदनशील क्षण वह बन गया, जब मंच से शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में कर्तव्यमय भाव से समर्पित कालाढूंगी के जाने-माने शिक्षाविद् ललित जोशी और उनकी धर्मपत्नी के नाम की घोषणा हुई। विद्यालय प्रबंधन और अतिथियों ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें स्मृति व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

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कालाढूंगी क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने और नौनिहालों के भविष्य को संवारने में ललित जोशी का योगदान अतुलनीय रहा है। वे न केवल एक निष्ठावान शिक्षक और मार्गदर्शक रहे हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की जीती-जागती मिसाल भी हैं। विद्यालय की चहारदीवारी से बाहर निकलकर उन्होंने समाज के कमजोर और जरूरतमंद तबके के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, पाठ्य सामग्री और फीस की व्यवस्था करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए हर समय तत्पर रहना और बिना किसी प्रचार-प्रसार के मौन साधक की तरह समाज को रोशनी देना उनकी कार्यशैली का मुख्य हिस्सा रहा है। यही कारण है कि जैसे ही उन्हें मंच पर आमंत्रित किया गया, समूचा सभागार देर तक बजती तालियों से गूंज उठा।

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सम्मान से अभिभूत होकर अपने उद्बोधन में ललित जोशी ने शिक्षा और जीवन मूल्यों पर अत्यंत प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल उपाधियां हासिल करने या आजीविका जुटाने का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर संवेदना, करुणा और चरित्र निर्माण का माध्यम है। ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के आंसू पोंछने और उसके जीवन में उजाला लाने के काम आए। यदि एक शिक्षित व्यक्ति किसी असहाय और जरूरतमंद के दर्द को महसूस नहीं कर सकता, तो उसकी शिक्षा अधूरी मानी जाएगी। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता की असली ऊंचाई इस बात से नहीं मापी जाती कि आपने कितना धन या पद अर्जित किया, बल्कि इससे तय होती है कि आपने कितने चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।

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सभागार में मौजूद शिक्षाविदों, अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों ने उनके इन विचारों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने मुख्य अतिथि, आमंत्रित अतिथियों, शिक्षकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आयोजन के सफल समापन की घोषणा की।

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