यूनिवर्सल कॉन्वेंट में वार्षिकोत्सव ‘अभ्युदय 2026’ की भव्य धूम: नौनिहालों के सांस्कृतिक व देशभक्ति प्रदर्शन ने मोहा सबका मन
हल्द्वानी। यूनिवर्सल कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विद्यालय का भव्य वार्षिक उत्सव ‘अभ्युदय 2026: ए कल्चरल ओडिसी’ अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, विद्यालय प्रबंधन और मंचासीन विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना और स्वागत गान से पूरा विद्यालय परिसर आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
प्रबंधन ने जताया आभार, अतिथियों का किया भव्य स्वागत
समारोह के शुभारंभ पर विद्यालय के संस्थापक एवं प्रबंधक सुनील जोशी तथा मंजू जोशी ने उपस्थित समस्त अतिथियों, अभिभावकों और प्रबुद्धजनों का पुष्पगुच्छ, शॉल व स्मृति चिह्न भेंट कर आत्मीय अभिनंदन किया। अपने संबोधन में सुनील जोशी व मंजू जोशी ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान उसके विद्यार्थियों के चरित्र, अनुशासन और संस्कारों से होती है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल कॉन्वेंट सदैव बच्चों को आधुनिक गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यालय की विकास यात्रा में अभिभावकों के निरंतर विश्वास और शिक्षकों की निष्ठा के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिभा को सही दिशा और खुला मंच प्रदान करना ही संस्थान का मुख्य ध्येय है।
“संस्कारयुक्त आधुनिक शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र की नींव”: मुख्य अतिथि
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने छात्र-छात्राओं की अद्वितीय प्रतिभा और विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा:
“शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल उपाधियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, जागरूक और आत्मनिर्भर नागरिक का निर्माण करना है। आज का युग तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य का है, जहां बौद्धिक विकास के साथ-साथ चारित्रिक दृढ़ता अत्यंत आवश्यक है। ‘अभ्युदय’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों में छिपी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को निखारने का कार्य करते हैं। जब विद्यालय बच्चों में ज्ञान के साथ अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भरते हैं, तभी एक सशक्त और समर्थ भारत का निर्माण होता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को असफलता से घबराए बिना निरंतर कर्मठ रहने और जीवन में उच्च आदर्श स्थापित करने का संदेश दिया।
नन्हे-मुन्नों की मनमोहक प्रस्तुतियां और देशभक्ति का ज्वार
वार्षिकोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की ऐसी अनूठी छटा बिखरी कि दर्शक दीर्घा में बैठा हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध रह गया। सांस्कृतिक यात्रा ‘अभ्युदय’ के अंतर्गत छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, कुमाऊंनी व गढ़वाली गीतों पर मनभावन लोकनृत्य प्रस्तुत कर देवभूमि की अनूठी विरासत को जीवंत कर दिया।
देशभक्ति से ओत-प्रोत नाट्य और नृत्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह के भीतर राष्ट्रीय स्वाभिमान का संचार किया; अमर शहीदों के बलिदान को दर्शाते दृश्य देखकर पूरा परिसर “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। वहीं, प्री-प्राइमरी और प्राइमरी विंग के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंग-बिरंगी वेशभूषा में परियों के नृत्य, हास्य-नाटिका और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते नृत्यों से सभी का दिल जीत लिया। बच्चों के आत्मविश्वास और मंच संतुलन की सभी ने करतल ध्वनि से मुक्तकंठ प्रशंसा की।
शहर के गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस गौरवशाली अवसर पर क्षेत्र के अनेक प्रमुख राजनेता, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता साक्षी बने। कार्यक्रम में मुख्य रूप से दर्जा राज्य मंत्री सुरेश चंद्र भट्ट, हल्द्वानी के मेयर गजराज सिंह बिष्ट, वरिष्ठ शिक्षाविद् मोहन चंद्र जोशी, शिक्षाविद ललित जोशी, भाजपा नेता मनोज पाठक, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा प्रदीप बिष्ट, दीपक बल्यूटिया, दयासागर बिष्ट, श्रीष पाठक, गौरव पाठक, प्रधानाचार्य पी. डी. पलड़िया, शौरभ पंत, राजेंद्र पाण्डे, राजेश पंत सहित विद्यालय के शिक्षक, शिक्षिकाएं और भारी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
समारोह का सुव्यवस्थित, रोचक और मधुर मंच संचालन कंचन पंत ने अपनी प्रवाहपूर्ण वाणी से किया, जिसकी सभी ने भूरि-भूरि सराहना की। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार द्वारा सभी अतिथियों, सहयोगियों और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी जनों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया और राष्ट्रगान के साथ इस स्मरणीय वार्षिकोत्सव का समापन हुआ।
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