लालकुआँ की सियासत में कौन है वह चेहरा, जिसने जीत लिया हर दिल? जब सादगी और सेवा की मूरत कमलेश चंदोला को मिला ‘माँ अवंतिका’ का पावन आशीष…

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लालकुआँ (विशेष संवाददाता): राजनीति की दुनिया में अक्सर दावों और नारों की गूँज सुनाई देती है, लेकिन कुछ विरले व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जिनकी पहचान शब्दों से नहीं, बल्कि ज़मीन पर बहे उनके पसीने और निःस्वार्थ कर्मों से होती है। लालकुआँ विधानसभा क्षेत्र के सियासी और सामाजिक क्षितिज पर आज एक ऐसा ही नाम जन-जन के विश्वास का पर्याय बनकर उभरा है—कमलेश चंदोला।

सवाल उठ रहा है कि आखिर वह कौन सी शक्ति है जिसने लालकुआँ की हर चौपाल, हर गली और हर वर्ग को एक सूत्र में पिरो दिया है? इसका सीधा उत्तर है—कमलेश चंदोला का निष्कलंक सेवाभाव और अगाध जनसमर्थन। 22 जग्गी बंगर-हल्दूचौड़ से पूर्व जिला पंचायत सदस्य रहे वरिष्ठ भाजपा नेता कमलेश चंदोला इस समय लालकुआँ विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रबल, सशक्त और स्वाभाविक दावेदार के रूप में हर दिल पर छाए हुए हैं।

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मानवीय गुणों की अद्भुत मिसाल, गरीबों के सच्चे मसीहा

कमलेश चंदोला केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की जीती-जागती मिसाल हैं। सरल, सहज और अत्यंत मिलनसार स्वभाव के धनी चंदोला उस वक्त सबसे पहले खड़े दिखाई देते हैं, जब कोई निर्धन, असहाय या पीड़ित व्यक्ति संकट में होता है। आधी रात को भी किसी की पुकार हो, वे अपने पराए का भेद मिटाकर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं। समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाना और हर आँख के आँसू पोंछना ही उनकी राजनीति का एकमात्र धर्म बन चुका है। जहाँ आज के दौर में नेताओं की कथनी और करनी के अंतर पर उँगलियाँ उठती हैं, वहीं कमलेश चंदोला ने अपनी निश्छल कार्यशैली से यह सिद्ध कर दिया है कि राजनीति सत्ता की सीढ़ी नहीं, बल्कि विशुद्ध लोक-कल्याण का महायज्ञ है।

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संस्कारों की पावन विरासत और जनसेवा का संकल्प

मूल रूप से बागेश्वर के पोखरी गाँव की पावन धरा से संबंध रखने वाले कमलेश चंदोला को यह जनसेवा का दिव्य भाव अपने पिता श्री जगन्नाथ चंदोला और पूज्य माता स्व. मोहनी देवी से विरासत में मिला है। कुलदेवता भगवान धौलीनाग के अनन्य उपासक चंदोला ने अपने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सानिध्य में निस्वार्थ राष्ट्र सेवा का जो पाठ पढ़ा था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। उनकी सादगी का ही चमत्कार है कि क्षेत्र का हर बुजुर्ग उन्हें अपने बेटे और हर युवा उन्हें अपने मार्गदर्शक के रूप में देखता है।

‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक भेंट: अध्यात्म और आशीर्वाद का संगम

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इसी लोकप्रियता और निष्ठा के सम्मान स्वरूप हाल ही में कमलेश चंदोला को परम पावन पुस्तक ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ सप्रेम भेंट की गई। देवी माँ के आशीर्वाद स्वरूपा इस भेंट ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। माँ भगवती की असीम अनुकंपा और क्षेत्रवासियों के असीम प्यार के इस अनुपम संगम को देख हर किसी का यही कहना था कि जिसके शीश पर माँ का आशीष और जनता का निस्वार्थ प्रेम हो, उसकी सच्ची समाज सेवा  एक आदर्श है

समूचे लालकुआँ क्षेत्र में आज अगर बदलाव और भरोसे की कोई सबसे सशक्त लहर चल रही है, तो उसका केंद्र बिंदु जननायक कमलेश चंदोला हैं, जिनकी निष्ठा पार्टी संगठन और आम जनता के प्रति अटूट व अविचल है।

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