पिथौरागढ़ / पिथौरागढ़ जनपद के डीडीहाट क्षेत्र में स्थित मढ़ का सूर्य मंदिर एक ऐसा पावन स्थल है जहाँ श्रद्धा, भक्ति और प्राकृतिक सौंदर्य का दिव्य संगम देखने को मिलता है। यह प्राचीन मंदिर न केवल सूर्य भगवान की उपासना का केन्द्र है, बल्कि कुमाऊँ क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अनुपम प्रतीक भी है।
मढ़ गाँव की ऊँची-नीची पहाड़ियों और हरियाली से घिरी यह पवित्र भूमि ऐसा प्रतीत होती है, मानो स्वयं प्रकृति भक्तों का स्वागत कर रही हो। जब सुबह की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह पर पड़ती है, तो सूर्यदेव की आभा मंदिर को सुवर्ण किरणों से आलोकित कर देती है। चारों ओर ठंडी बयार, कल-कल करती नदियाँ और हरियाली का मनोरम दृश्य हृदय को शांति और ऊर्जा से भर देता है।
मंदिर परिसर में सात अश्वों वाले रथ पर विराजमान सूर्यदेवता की विशाल मूर्ति उनके दिव्य तेजस्वी वैभव और अनंत शक्ति का प्रतिक है। इसके चारों ओर शिव-पार्वती, विष्णु, दुर्गा एवं अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर इस पावन स्थल की पूर्ण दिव्यता को दर्शाते हैं। श्रद्धालु इसे प्रेमपूर्वक आदित्यगांव के नाम से भी पुकारते हैं।
यह दिव्य स्थल डीडीहाट से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर, चौबती कस्बे के समीप स्थित है। मंदिर तक पहुँचने के लिए मोटर मार्ग से आगे लगभग 2 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह मार्ग केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति और भक्ति का संगम है—जहाँ हर कदम पर हिमालय की गोद और सूर्यदेव की दिव्यता का अनुभव होता है।
प्रतिदिन यहाँ श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। माघ मास की सूर्य षष्ठी पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और दीपोत्सव का आयोजन होता है। मंदिर की पुरातन वास्तुकला और स्थानीय ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित संरचना सदियों की आध्यात्मिक गाथा का साक्ष्य है।
स्थानीय समाज और धार्मिक यात्रियों का कहना है कि मढ़ का सूर्य मंदिर केवल हृदय को शांति नहीं देता, बल्कि हिमालय की अलौकिक सुंदरता, सूर्य की दिव्यता और आत्मा की शुद्धि का अनुभव भी कराता है।
कुल मिलाकर मढ़ का सूर्य मंदिर वह पवित्र स्थल है जहाँ श्रद्धा, प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालय की ऊँचाइयों का दिव्य संगम देखने को मिलता है। यहाँ आने वाला प्रत्येक भक्त “ॐ सूर्याय नमः” के मंत्रोच्चार के साथ सूर्यदेव की दिव्यता और पर्वतीय वातावरण की शांति का अनुभव करता है मानो प्रकृति और परमात्मा का मिलन सीधे हृदय में उतर रहा हो।
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