Category: धार्मिक / आध्यात्मिक

पौराणिकता, धार्मिकता, लोक संस्कृति, और प्रकृति की आराधना से परिपूर्ण छठ पर्व

  लोक आस्था का महापर्व, छठ पर्व मेरा सबसे प्रिय पर्व है। इसलिए भी क्योंकि छठ लोक का पर्व है और यह अपने भीतर पौराणिकता, धार्मिकता, लोक संस्कृति, और प्रकृति….

भगवान शिव और माता पार्वती की बहू है छठ मैया माँ गौरी की प्रेरणा से माता सीता ने व भगवान शिव की प्रेरणा से द्रौपदी ने किया छठ व्रत पूजन आरम्भ महाभारत काल से आ रही छठ पूजा की परम्परा अंगराज कर्ण को भी माना जाता है,छठ व्रत पूजन का आरम्भकर्ता अब उत्तराखण्ड में भी छाने लगी है छठ पर्व की धूम

  बिहार के लोकजीवन में महीनों पूर्व से जिस व्रत को लेकर काफी उत्साह व उमंग छायी रहती है, जिसकी तैयारी पूर्ण मनोयोग के साथ शुद्धता एवं निर्मलता के साथ….

यम द्वितीया पर पूजे जाते हैं लेखकों को अक्षर प्रदान करने वाले यह देवता

भारतीय समाज में कायस्थ एक बुद्धिजीवी एवं चतुर जाति मानी जाती है। मध्यकाल में तो यह मान्यता थी कि राज-काज के संचालन में इससे कुशल एवं प्रवीण कोई अन्य जाति….

भाई की लंबी उम्र की कामना का पर्व भाई दूज

अनेेकता में एकता ही भारत की विशेषता रही है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण इसके राष्ट्रीय त्यौहार ही हैं, जो कि सारे वर्ष चलते रहते हैं। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और….

बगलामुखी महायज्ञ के अवसर पर दतिया ( म.प्र ) में होगा ” जय माँ बगलामुखी ” पुस्तक का भव्य विमोचन पूर्व जज स्व० उमाशंकर पाण्डेय की मधुर स्मृति में लिखी गई है पुस्तक

लालकुआं ( नैनीताल ), मध्य प्रदेश के दतिया स्थित श्री हनुमान धाम में आगामी 7 नवम्बर 2024 को आयोजित हो रहे बगलामुखी महायज्ञ के अवसर पर ” जय माँ बगलामुखी….

दुर्लभ रहस्य : रामेश्वर में शिव पूजन के बाद श्री राम ने दिया था नर लीला को विराम पढ़िये रामेश्वर की महिमां

सरयू और रामगंगा के मध्य जागेश्वर महिमा को पूर्णित करने वाला तीर्थ रामेश्वर की महिमा भी अनादि व अनन्त है। यह स्थल भगवान श्री राम का पूज्यनीय स्थल होने के….

जानिए :श्री राम जन्मभूमि आदिपुरी अयोध्या की महिमां है

अयोध्या/ श्री रामचंद्र जी की जन्मभूमि अयोध्या की महिमा तीनों लोकों में अपरंपार है, सनातन संस्कृति की मर्यादा का विराट वैभव यहाँ सर्वत्र बिखरा हुआ है। सूर्यवंशी राजाओं की महा….

खुशी-खुशी मनायें दीवाली

दीपावली भारतवर्ष का एक प्राचीन त्यौहार है। जैसा नाम से ही स्पष्ट है यह अंधेरे पर उजाले का, अज्ञान पर ज्ञान का, बुराई पर अच्छाई का, विषाद पर हर्ष की….

धर्म, संस्कृति और परंपरा का प्रतिबिम्ब है दीपोत्सव

आज कलियुग के प्रथम चरण में हर ओर अधिक से अधिक सुख साधन संपत्ति जुटाने की होड़ लगी है इस आपाधापी में जीवन का नैसर्गिक स्वरूप मनुष्य खुद नष्ट कर….

सादगी,संपन्नता, सुख-समृद्धि , शांति व ऐश्वर्य के भी प्रतीक हैं मिट्टी के दीपक

  दीपावली (संस्कृत: दीपावलिः = दीप + आवलिः = पंक्ति) का अर्थ ही पंक्ति में रखे हुए दीपकों से होता है, लेकिन अब दीपावली पर मिट्टी के दीपक कम, चाइनीज़….