नियति का क्रूर प्रहार: पिता को खोया, दोनों किडनियां भी हुईं खराब… एम्स में जिंदगी की जंग लड़ रहे संदीप को अब समाज से ही आस

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राम नगर / खटीमा।
कहते हैं कि जब मुसीबत आती है तो हर तरफ से घेर लेती है। रामनगर के पीरुमदारा (धनपुर गुसाईं) में रह रहे और मूल रूप से रिखणीखाल के कोटड़ीसैन निवासी संदीप गुसाईं के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिछले पांच-छह वर्षों से दोनों किडनियां खराब होने के कारण संदीप गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी के चलते उन्हें अपनी आजीविका का एकमात्र साधन यानी अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी है।
पिछले तीन वर्षों से संदीप का निरंतर उपचार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में चल रहा है। एम्स के चिकित्सकों द्वारा सभी आवश्यक जाँचें पूरी कर ली गई हैं और अब केवल किडनी प्रत्यारोपण की तिथि मिलना बाकी है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण समय में संदीप के छोटे भाई ने अपनी एक किडनी देकर अपने बड़े भाई की सांसों को बचाने का फैसला किया है।
लेकिन इस प्रत्यारोपण ऑपरेशन और आगामी उपचार का अनुमानित खर्च लगभग 9 लाख 81 हजार रुपये आ रहा है। एक साधारण परिवार के लिए इतनी बड़ी धनराशि जुटाना पूरी तरह से असंभव सा साबित हो रहा है। परिवार पर दुखों का पहाड़ तब और गहरा गया जब हाल ही में संदीप के पिता का भी हृदयघात से आकस्मिक निधन हो गया। पिता के साये के बिना पूरे परिवार की जिम्मेदारी अब संदीप के ही कंधों पर टिक गई है।
इस बेहद कठिन और मार्मिक घड़ी में उत्तराखंड क्रांति दल के कर्मचारी एवं अधिकारी प्रकोष्ठ के केंद्रीय उपाध्यक्ष पंकज सिंह मनोला ने आम जनता, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों से आगे आकर मदद करने की अपील की है।
पंकज सिंह मनोला ने कहा कि ऐसे संकट के समय में आम जन का एक छोटा सा प्रयास भी इस परिवार के लिए नई जिंदगी की किरण बन सकता है। उन्होंने निवेदन किया कि चाहे सहायता 100 रुपये की हो, 500 रुपये की हो या उससे अधिक, हर एक योगदान संदीप के इलाज के लिए बेहद अमूल्य है। उन्होंने सभी संवेदनशील नागरिकों से अपनी सामर्थ्य अनुसार आर्थिक सहयोग देने और इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करने का आह्वान किया है, ताकि समय पर संदीप का उपचार संपन्न हो सके।