जब माँ अवंतिका के दरबार में अलौकिक ढंग से गूंजे वैदिक मंत्र: जानिए किस दिव्य महाअनुष्ठान के पूर्ण होते ही उमड़ पड़ा आस्था का सैलाब!

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लालकुआँ : माँ अवंतिका मंदिर शक्ति स्थल पर आज का दिन भक्ति, श्रद्धा और असीम ऊर्जा का साक्षी बना। विक्रम ऐसोशियेशन हल्द्वानी लालकुआँ के तत्वावधान में आयोजित विशेष शनि यज्ञ का आज संपूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ भव्य उद्यापन संपन्न हुआ। आहुतियों की गूंज और स्वाहा के स्वर से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा, जिससे उपस्थित हर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गया।
इस पावन और महा-अनुष्ठान का कार्य आचार्य पण्डित चन्द्रशेखर जोशी ने संपूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान व भावपूर्ण पूजा-अर्चना के साथ संपन्न कराया। इस दिव्य यज्ञ में श्री भजन सिंह मेहरा ने मुख्य यजमान के रूप में बैठकर विधि-विधान से पूजन संपन्न किया और लोक-कल्याण की कामना की।
सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन का भावुक पल
अनुष्ठान के सफल समापन पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मण खाती ने विक्रम एसोशिएशन के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों का हृदय से धन्यवाद अदा किया। उन्होंने इस अवसर पर एसोशिएशन के अध्यक्ष मुरलीधर पाण्डे को ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ की पवित्र पुस्तक एवं रुद्राक्ष की माला भेंट कर सम्मानित किया। लक्ष्मण खाती ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि सभी श्रद्धालुओं की अनन्य आस्था सदैव माँ अवंतिका के श्री चरणों में बनी रहे और माँ की दिव्य कृपा हर भक्त के जीवन पर अनवरत बरसती रहे।
सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता बलवन्त सिंह बिष्ट का प्रेरक बयान
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे एडवोकेट एवं प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता बलवन्त सिंह बिष्ट ने अपने ओजस्वी विचारों से सभी को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “धार्मिक और वैदिक अनुष्ठान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और समाज में एकजुटता लाने का सशक्त माध्यम हैं। जब विक्रम एसोशिएशन जैसी संस्थाएं इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए आगे आती हैं, तो पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। न्याय के देवता शनिदेव और आदि शक्ति माँ अवंतिका की अनुकंपा से हमारे समाज में सुख, शांति और न्याय का मार्ग सदैव प्रशस्त रहे।”
उद्यापन एवं शनि देव के भण्डारे का सनातन महत्व
सनातन परंपरा में किसी भी व्रत, नियम या यज्ञ के समापन पर ‘उद्यापन’ का विशेष धार्मिक महत्व है। उद्यापन का अर्थ है संकल्प की पूर्णता। बिना उद्यापन के अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। यह ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करने और यज्ञ के पुण्य फल को जन-जन में बांटने का माध्यम है।
वहीं, शनि देव के भण्डारे का महत्व अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना गया है। शनिदेव न्याय और कर्मफल के देवता हैं। भण्डारे का आयोजन करने और उसमें प्रसाद वितरण व ग्रहण करने से मनुष्य के भीतर से अहंकार और भेदभाव की भावना समाप्त होती है। यह सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है तथा शनि दोषों व कष्टों से मुक्ति दिलाकर जीवन में समृद्धि, आरोग्य और शांति प्रदान करता है।
भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अलौकिक धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अवसर पर एसोशिएशन के अध्यक्ष मुरलीधर पाण्डे, यजमान भजन सिंह मेहरा, यशपाल, प्रेम सुयाल, प्रेम सिंह, गणेश जोशी, पूरन शर्मा, मोहन उपाध्याय, भीम सिंह, सुभाष, शंकर पनेरू, हिमांशु, दिवान सिंह, भूपेन्द्र सिंह, दिनेश फुलारा, सतीश पाण्डे, सतीश जोशी, ललित जोशी, गोपाल दत्त जोशी, प्रकाश भट्ट, गोपाल दत्त के अलावा युवराज सिंह खाती, वरुण पाठक, हेमन्त बिष्ट, तरुण बिष्ट, प्रभास, मुकेश मिश्रा तथा रणवीर सिंह खाती सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।