हल्द्वानी/ (रिम्पी बिष्ट)। जब कुदरत का कहर और प्रशासनिक बाधाएं मासूम बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर दें, तब किसी चमत्कार की ही उम्मीद की जाती है। कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला प्राथमिक विद्यालय जयपुर बीसा में, जहाँ परिसर में लगातार हो रहे जलभराव और जर्जर भवन के कारण नन्हे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुँच गई थी। स्कूल का पुनर्निर्माण होना तय था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि तब तक इन नौनिहालों की शिक्षा का क्या होगा?
ऐन वक्त पर सामने आई अप्रत्याशित मदद
जब बच्चों के भविष्य पर असमंजस के बादल मंडरा रहे थे, तभी शैमफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल के चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता दया सागर बिष्ट ने मानवीय संवेदना की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने बिना किसी देरी के जयपुर बीसा प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए अपने प्रतिष्ठित विद्यालय के दो आधुनिक कक्ष पूरी तरह निःशुल्क खोल दिए। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक कि प्राथमिक विद्यालय का नया भवन बनकर तैयार नहीं हो जाता।
सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए खुली आधुनिकता की नई खिड़की
इस संवेदनशील पहल का असर केवल सुरक्षित छत मिलने तक सीमित नहीं रहा। शेमफोर्ड स्कूल पहुँचते ही इन ग्रामीण बच्चों के लिए एक नई दुनिया के कपाट खुल गए:
- आधुनिक लैब व लाइब्रेरी का अनुभव: विद्यार्थियों को विद्यालय के समृद्ध पुस्तकालय, हाई-टेक गणित प्रयोगशाला और अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब का भ्रमण कराया गया।
- उत्साह और पुरस्कार: आधुनिक शैक्षणिक माहौल को देखकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। इस मौके पर चेयरमैन दया सागर बिष्ट ने बच्चों से संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें पुरस्कृत भी किया।
सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल
अधिवक्ता दया सागर बिष्ट का मानना है कि शिक्षा ही किसी भी समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव है; इसलिए संकट के समय सक्षम व्यक्तियों को आगे आकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

इस मानवीय प्रयास को धरातल पर उतारने में विद्यालय के निदेशक राजेश बिष्ट, चेयरपर्सन ऋचा बिष्ट, शैक्षणिक निदेशक अंजू भट्ट, प्रधानाचार्या संतोष पांडेय सहित पूरे शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर स्टाफ का विशेष योगदान रहा। शिक्षा के प्रति यह सामूहिक समर्पण आज पूरे क्षेत्र में चर्चा और प्रशंसा का केंद्र बना हुआ है।
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