लालकुआँ। शक्ति की अधिष्ठात्री माँ भगवती के पावन धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि अंतर्मन को असीम ऊर्जा और शांति प्रदान करने वाले दिव्य ऊर्जा-पुंज हैं। लालकुआँ स्थित सुविख्यात शक्ति स्थल माँ अवंतिका कुंज मंदिर में उस समय आस्था, विज्ञान और संस्कृति की अनुपम त्रिवेणी प्रवाहित हो उठी, जब केंद्रीय लुगदी एवं कागज अनुसंधान संस्थान (सी.पी.पी.आर.आई.), सहारनपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक व विभागाध्यक्ष डॉ. नितिन के. एंडले (पर्यावरण प्रबंधन एवं केमिकल रिकवरी विभाग) माँ के दरबार में नतमस्तक होने पहुँचे।
मंदिर परिसर के शांत, सुरम्य और अलौकिक वातावरण से भावविभोर होकर डॉ. एंडले ने माँ अवंतिका के श्रीचरणों में लोक-कल्याण, सर्वजन हिताय और पर्यावरण संरक्षण की मंगल कामना की।
‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक की पावन भेंट और आत्मीय अभिनंदन
इस गरिमामयी अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण खाती एवं श्रद्धालुओं ने डॉ. एंडले को पारंपरिक मंगल पट्टिका पहनाकर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। मंदिर के मुख्य आचार्य चन्द्र शेखर जोशी ने पूर्ण वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ माँ की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
माँ अवंतिका धाम की अलौकिक अनुभूतियों की महक स्मृतियों में सदैव जीवंत रहे, इस भाव के साथ आचार्य चन्द्र शेखर जोशी व समिति द्वारा डॉ. एंडले को ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक सप्रेम भेंट की गई।
इस विशेष क्षण के साक्षी आईटीसी (ITC) पेपर मिल के उपाध्यक्ष नरेश चन्द्रा भी बने। श्री चन्द्रा ने भी डॉ. एंडले के साथ माँ के विग्रह के सम्मुख शीश नवाया और क्षेत्र की निरंतर प्रगति व सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
सहारनपुर की शिवालिक कंदराओं से गूंजा माँ शाकम्भरी का संदेश
पूजा-अर्चना के उपरांत डॉ. नितिन के. एंडले ने सहारनपुर क्षेत्र की सुरम्य शिवालिक पहाड़ियों में विराजीं माँ शाकम्भरी पीठ के आध्यात्मिक और पौराणिक वैभव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सहारनपुर का शाकम्भरी धाम सनातन धर्म की वह जाग्रत पीठ है जो हमें प्रकृति, वनस्पति और जीवनदायिनी शक्तियों के प्रति कृतज्ञ होना सिखाती है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे जीवन में जब भी समय निकालें, सहारनपुर स्थित माँ शाकम्भरी के इस पावन सिद्धपीठ के दर्शन कर आत्मिक शांति और पुण्य फल अवश्य प्राप्त करें।
माँ अवंतिका और माँ शाकम्भरी: शक्ति और प्रकृति की एकात्म चेतना
लालकुआँ के माँ अवंतिका कुंज और सहारनपुर के शाकम्भरी पीठ का यह वैचारिक संगम केवल दो भौगोलिक क्षेत्रों का मिलन नहीं, बल्कि शक्ति के दो मूल स्वरूपों की एकात्मता है।
माँ अवंतिका साधक को आंतरिक प्रकाश, निर्भयता और आत्मिक चेतना का संबल देती हैं।
माँ शाकम्भरी बाह्य जगत में अन्न, जल, वनस्पति और औषधियों के रूप में प्रत्येक जीव का पोषण करती हैं।
‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक की आध्यात्मिक प्रेरणा और शाकम्भरी महात्म्य की चर्चा ने भक्तों को यह बोध कराया कि सनातन शक्ति दर्शन संहार से कहीं अधिक संरक्षण, वात्सल्य और प्रकृति प्रेम का मार्ग है।
शाकम्भरी पीठ: अन्नपूर्णा स्वरूपा माँ का विराट वैभव व पौराणिक साक्ष्य
‘शाकम्भरी’ का शाब्दिक अर्थ ही है—“शाकों (वनस्पतियों, औषधियों व कंद-मूल) से संपूर्ण संसार की क्षुधा शांत करने वाली करुणामयी आदिशक्ति।”
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब दुर्गमासुर के आतंक से सौ वर्षों तक वर्षा नहीं हुई और धरा त्राहि-त्राहि कर उठी, तब माँ ने अपने सौ नेत्रों से अश्रु बहाकर सूखी धरती को सींचा, जिससे वे शताक्षी कहलाईं। इसके बाद अपने श्रीविग्रह से औषधियां, फल और अन्न उत्पन्न कर समस्त प्राणियों को जीवनदान दिया।
प्रमुख ग्रंथों में माँ शाकम्भरी की महिमा:
* देवी भागवत पुराण: संकट काल में देवताओं और पृथ्वी की रक्षा हेतु देवी के शाकम्भरी अवतार का विस्तृत आख्यान।
* स्कंद पुराण: माँ शाकम्भरी के प्राकट्य, उनके निवास और समस्त जगत की अन्नदाता के रूप में विशद व्याख्या।
* मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती): देवी के पोषणकर्ता व अन्नदायिनी स्वरूप का स्पष्ट उल्लेख।
* महाभारत (अनुशासन पर्व): समस्त सृष्टि को पोषण और जीवन रस प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में माँ का गुणगान।
* ब्रह्माण्ड व लिंग पुराण: पृथ्वी पर जीवन रक्षा और संतुलन स्थापित करने वाले लोककल्याणकारी शाकम्भरी स्वरूप की व्याख्या।
विस्तृत स्वरूप और समसामयिक संदेश
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में स्थित मुख्य सिद्ध पीठ के अलावा राजस्थान के सीकर, सिरोही, चित्तौड़गढ़, मध्य प्रदेश के मालवा तथा गुजरात के विभिन्न अंचलों में भी माँ शाकम्भरी के जाग्रत मंदिर स्थित हैं।
आज के संघर्षपूर्ण युग में माँ शाकम्भरी का यह पावन संदेश हमें अन्न के सम्मान, जल-जंगल के संरक्षण और असहायों की सेवा के लिए प्रेरित करता है। लालकुआँ में आयोजित इस आध्यात्मिक मिलन ने शक्ति उपासना को पर्यावरण और मानव-कल्याण के व्यापक परिप्रेक्ष्य से जोड़ दिया।
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