भाव की भक्ति या दिखावे का दौर: आज भी क्यों प्रासंगिक हैं महाप्रभु वल्लभाचार्य
“महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के शुद्धाद्वैत और पुष्टिमार्ग के सिद्धांत, जो अनुभाष्य और सुबोधिनी जैसे ग्रंथों में मिलते हैं, उसका भाव यही है कि “भक्ति में आडंबर नहीं, भाव होना….










